Current Affairs

भारत का चावल-गेहूं समर्थन WTO में 2026 में US द्वारा चुनौती

2026 में अमेरिका और अन्य देशों ने WTO में भारत की चावल और गेहूं के लिए बाजार मूल्य समर्थन को कम बताने का आरोप लगाया है। जानें इस विवाद के मायने और प्रतियोगी परीक्षा के लिए महत्व।

Share:
भारत का चावल-गेहूं समर्थन WTO में 2026 में US द्वारा चुनौती

परिचय

2026 में भारत एक बार फिर विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization - WTO) में एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विवाद के केंद्र में है। संयुक्त राज्य अमेरिका और कुछ अन्य राष्ट्रों ने भारत पर चावल और गेहूं के लिए अपने बाजार मूल्य समर्थन (Market Price Support - MPS) को कम रिपोर्ट करने का आरोप लगाया है। यह विकास कृषि सब्सिडी और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों पर चल रहे वैश्विक तनावों को उजागर करता है, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए, जहाँ किसानों को समर्थन देना एक संवेदनशील राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा है। करंट अफेयर्स के दृष्टिकोण से, यह घटना प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति, कृषि नीति और WTO के कामकाज से संबंधित कई महत्वपूर्ण अवधारणाओं को छूती है। सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय विवादों के निहितार्थों को समझना चाहिए, क्योंकि ये देश की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को सीधे प्रभावित करते हैं। यह विवाद WTO के "कृषि समझौते" के प्रावधानों के इर्द-गिर्द घूमता है, जो सदस्य देशों द्वारा दी जाने वाली कृषि सब्सिडी को नियंत्रित करता है।

मुख्य विवरण

WTO में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया है कि भारत चावल और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के लिए अपने बाजार मूल्य समर्थन की गणना में अनियमितताएं कर रहा है। आरोप है कि भारत अपनी कृषि सब्सिडी को कम करके आंक रहा है, जिससे वह WTO के कृषि समझौते के तहत निर्धारित घरेलू समर्थन की सीमा (de minimis limit) का उल्लंघन कर रहा है। WTO के नियमों के अनुसार, विकासशील देशों को कृषि उत्पादन के कुल मूल्य के 10% तक की सब्सिडी प्रदान करने की अनुमति है, जबकि विकसित देशों के लिए यह सीमा 5% है। अमेरिका का तर्क है कि भारत द्वारा अपने किसानों को दिए जाने वाले समर्थन, विशेष रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के माध्यम से, उसकी रिपोर्ट की गई सीमा से कहीं अधिक है। यह आरोप एक जटिल गणना पद्धति पर आधारित है जिसमें यह देखा जाता है कि किसानों को मिली कीमत और एक निर्धारित बाहरी संदर्भ मूल्य के बीच कितना अंतर है। अमेरिका ने इस गणना में उपयोग किए जाने वाले संदर्भ मूल्य की वैधता पर सवाल उठाया है, जिसे भारत ने 1986-88 के आधार वर्ष से लिया है। भारत का रुख रहा है कि उसकी सब्सिडी किसानों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और आजीविका प्रदान करने के लिए आवश्यक है, और इसका व्यापार पर विकृतिपूर्ण प्रभाव कम है। भारत ने यह भी तर्क दिया है कि उसके खाद्य कार्यक्रम विश्व व्यापार नियमों के तहत 'शांति खंड' (peace clause) के अंतर्गत आते हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भारत और विकसित देशों, विशेष रूप से अमेरिका, के बीच कृषि सब्सिडी को लेकर विवाद नया नहीं है। यह दशकों से WTO की वार्ताओं में एक प्रमुख मुद्दा रहा है। WTO का कृषि समझौता जिसका उद्देश्य कृषि व्यापार में विकृतियों को कम करना है, विकसित और विकासशील देशों के बीच गहरी खाई पैदा करता है। विकासशील देश, जिनमें भारत भी शामिल है, तर्क देते हैं कि उनके किसानों को समर्थन देना गरीबी उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, और विकसित देशों ने ऐतिहासिक रूप से अपने किसानों को अत्यधिक सब्सिडी दी है। 'शांति खंड' एक अस्थायी उपाय है जो विकासशील देशों को कृषि सब्सिडी के मामले में WTO के नियमों के उल्लंघन के लिए कानूनी चुनौतियों से बचाता है, बशर्ते वे कुछ शर्तों का पालन करें। भारत ने बाली मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (2013) में इस खंड का लाभ उठाया था और इसे बाद में स्थायी रूप से विस्तारित किया गया। अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे विकसित देश अक्सर भारत के MSP कार्यक्रम और सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग कार्यक्रमों पर चिंता व्यक्त करते हैं, यह दावा करते हुए कि ये विश्व बाजार में वस्तुओं की कीमतें कम करते हैं और उनके अपने किसानों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह विवाद WTO में बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के भविष्य और विकासशील देशों के विशेष और विभेदक उपचार के अधिकार के लिए भी महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है।

प्रभाव और महत्व

WTO में इस तरह के विवादों का भारत पर कई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। सबसे पहले, यदि भारत को दोषी ठहराया जाता है, तो उसे अपनी कृषि नीतियों, विशेष रूप से MSP कार्यक्रमों में बदलाव करने के लिए मजबूर किया जा सकता है, जिससे लाखों किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। दूसरा, यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार साख को प्रभावित कर सकता है और भविष्य की व्यापार वार्ताओं में उसकी स्थिति को कमजोर कर सकता है। तीसरा, यह खाद्य सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं को बढ़ा सकता है, क्योंकि MSP भारत के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और बफर स्टॉक प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। एक सफल WTO चुनौती अन्य देशों को भी भारत के कृषि निर्यात पर प्रतिशोधात्मक टैरिफ लगाने के लिए प्रेरित कर सकती है। इसके विपरीत, यदि भारत अपने रुख का सफलतापूर्वक बचाव करता है, तो यह विकासशील देशों के लिए एक मिसाल कायम करेगा और WTO के भीतर विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूत करेगा। यह विवाद भारत की विदेश नीति और भू-राजनीतिक संबंधों को भी प्रभावित करेगा, विशेषकर अमेरिका के साथ। अंततः, यह भारत की घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति और कृषि उत्पादन को भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकता है।

परीक्षा के लिए महत्व

  • UPSC: Prelims में WTO, उसके कार्य, कृषि समझौता, MSP, खाद्य सुरक्षा, शांति खंड और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित अवधारणाओं पर प्रश्न आ सकते हैं। Mains में, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, अर्थव्यवस्था और विकास के पेपर में भारत की कृषि नीति, WTO में भारत की स्थिति, और कृषि सब्सिडी पर वैश्विक बहस पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

  • SSC: General Awareness सेक्शन में WTO का मुख्यालय, स्थापना, भारत के साथ इसके प्रमुख विवाद, और MSP जैसे कृषि से संबंधित सामान्य ज्ञान के प्रश्न आ सकते हैं।

  • Banking: IBPS PO, SBI PO, और RBI परीक्षाओं में वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन और भारत के कृषि क्षेत्र पर उनके प्रभावों से संबंधित प्रश्न आते हैं। कृषि सब्सिडी और खाद्य सुरक्षा से जुड़े आर्थिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।

  • Railway: RRB परीक्षाओं के General Awareness सेक्शन में अंतर्राष्ट्रीय संगठन (जैसे WTO), भारत की कृषि नीतियां और प्रमुख आर्थिक विवादों से संबंधित सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  • प्रश्न 1: 2026 में अमेरिका ने WTO में भारत पर किस फसल के बाजार मूल्य समर्थन को कम रिपोर्ट करने का आरोप लगाया है? उत्तर: अमेरिका ने भारत पर चावल और गेहूं के लिए बाजार मूल्य समर्थन को कम रिपोर्ट करने का आरोप लगाया है।

  • प्रश्न 2: WTO के कृषि समझौते के तहत विकासशील देशों के लिए घरेलू कृषि समर्थन की 'डी मिनिमिस' सीमा क्या है? उत्तर: विकासशील देशों के लिए यह सीमा कृषि उत्पादन के कुल मूल्य का 10% है।

  • प्रश्न 3: 'शांति खंड' (peace clause) किस अंतर्राष्ट्रीय संगठन से संबंधित है और यह क्या सुविधा प्रदान करता है? उत्तर: 'शांति खंड' WTO से संबंधित है और यह विकासशील देशों को कृषि सब्सिडी के मामले में नियमों के उल्लंघन के लिए कानूनी चुनौतियों से बचाता है, कुछ शर्तों के तहत।

याद रखने योग्य तथ्य

  • 2026 में अमेरिका ने WTO में भारत के चावल-गेहूं के MPS पर सवाल उठाया है।

  • यह विवाद WTO के कृषि समझौते और 'डी मिनिमिस' सीमा से संबंधित है।

  • भारत अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए MSP को आवश्यक मानता है।

दैनिक करंट अफेयर्स अपडेट के लिए JobSafal पर विजिट करें।

Tags

करंट अफेयर्स
WTO
कृषि
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
प्रतियोगी परीक्षा

Related Articles

FY26 में स्मार्टफोन भारत के निर्यात चैंपियन बने 2026
Current Affairs
FY26 में स्मार्टफोन भारत के निर्यात चैंपियन बने 2026
वित्त वर्ष 2025-26 में स्मार्टफोन भारत के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बनकर उभरे हैं, 'मेक इन इंडिया' और PLI योजना की सफलता को दर्शाते हुए। जानें इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।
April 23, 2026
राज्य पूंजीगत व्यय से GDP में वृद्धि: SASCI योजना 2026
Current Affairs
राज्य पूंजीगत व्यय से GDP में वृद्धि: SASCI योजना 2026
2026 में राज्य पूंजीगत व्यय GDP का 2.7% तक पहुंचा, जो केंद्र की SASCI योजना से प्रेरित है। जानें इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और सरकारी नौकरी परीक्षाओं के लिए महत्व।
April 23, 2026
Smartphones Emerge as India's Export Champions in FY26
Current Affairs
Smartphones Emerge as India's Export Champions in FY26
Discover how smartphones became India's top export champions in FY26, signaling a major boost for manufacturing, 'Make in India,' and economic growth.
April 23, 2026
Addressing India's Plastic Packaging Challenge and Policy 2026
Current Affairs
Addressing India's Plastic Packaging Challenge and Policy 2026
Explore India's growing plastic packaging problem in 2026, from boom to crisis, and the policy measures for waste management and a circular economy.
April 23, 2026
RBI Strengthens Prepaid Payment Instruments (PPI) Framework 2026
Current Affairs
RBI Strengthens Prepaid Payment Instruments (PPI) Framework 2026
Explore the RBI's 2026 measures to strengthen the Prepaid Payment Instruments (PPI) framework, enhancing security, interoperability, and consumer protection.
April 23, 2026
State Capital Expenditure Boosts GDP via SASCI Scheme 2026
Current Affairs
State Capital Expenditure Boosts GDP via SASCI Scheme 2026
Learn how State Capital Expenditure (Capex) reached 2.7% of GDP in 2026 under the Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment (SASCI).
April 23, 2026