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भारत ने US-इजराइल-ईरान संघर्ष 2026 के बीच ईरान से नागरिकों को निकाला

17 मार्च 2026 को भारत ने US-इजराइल-ईरान संघर्ष के बीच ईरान से 600 से अधिक नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला। जानें इस मानवीय मिशन और विदेश नीति का महत्व।

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भारत ने US-इजराइल-ईरान संघर्ष 2026 के बीच ईरान से नागरिकों को निकाला

परिचय

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका (US)-इजराइल-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, भारत ने 17 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण मानवीय मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs - MEA) ने पुष्टि की कि भारत ने ईरान से अपने 600 से अधिक नागरिकों को आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते सुरक्षित निकाला है। यह मिशन संकटग्रस्त क्षेत्रों से अपने नागरिकों को निकालने की भारत की प्रतिबद्धता और प्रभावी विदेश नीति का प्रमाण है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों, विशेषकर UPSC, SSC, Banking और Railway जैसी प्रतियोगी परीक्षा देने वालों के लिए, यह घटना करंट अफेयर्स, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और भारत की भू-राजनीतिक रणनीतियों की समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्य विवरण

विदेश मंत्रालय द्वारा 17 मार्च 2026 को जारी एक बयान के अनुसार, भारत सरकार ने ईरान से 600 से अधिक भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला है। यह निकासी अभियान पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण उत्पन्न हुई गंभीर सुरक्षा स्थिति और बढ़ते तनाव के मद्देनजर शुरू किया गया था। नागरिकों को सुरक्षित रूप से निकालने के लिए एक जटिल लॉजिस्टिक योजना का उपयोग किया गया, जिसमें उन्हें सड़क और हवाई मार्ग से आर्मेनिया और अज़रबैजान जैसे पड़ोसी देशों से होकर गुजारा गया, क्योंकि सीधे उड़ान मार्ग या अन्य पारंपरिक निकासी रास्ते उपलब्ध नहीं थे या असुरक्षित थे। भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए, जिसमें ईरान, आर्मेनिया और अज़रबैजान में भारतीय दूतावासों और राजनयिक चैनलों का सक्रिय उपयोग शामिल है। यह मिशन भारतीय डायस्पोरा (प्रवासी भारतीयों) की सुरक्षा और कल्याण के प्रति भारत की "पहले नागरिक" (Citizen First) नीति को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक स्तर पर अपने नागरिकों की सहायता करने की क्षमता रखता है, भले ही अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों। निकाले गए लोगों में मुख्य रूप से छात्र, पेशेवर और तीर्थयात्री शामिल थे जो ईरान में फंसे हुए थे और जिन्होंने सहायता के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क किया था।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

पश्चिम एशिया लंबे समय से भू-राजनीतिक अस्थिरता का केंद्र रहा है, जिसमें ईरान की भूमिका केंद्रीय है। अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के संबंध दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और विभिन्न प्रॉक्सी संघर्ष प्रमुख मुद्दे हैं। हाल के वर्षों में, इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है, जिससे भारतीय नागरिकों सहित कई विदेशी नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध रहे हैं, विशेष रूप से ऊर्जा और चाबहार बंदरगाह के विकास के संबंध में। हालांकि, भारत हमेशा से अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहा है। अतीत में भी भारत ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों से, जैसे यूक्रेन (ऑपरेशन गंगा), यमन (ऑपरेशन राहत) और अफगानिस्तान, अपने हजारों नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला है, जो उसकी मजबूत राजनयिक उपस्थिति और संकट प्रबंधन क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। वर्तमान निकासी उस व्यापक भारतीय विदेश नीति का हिस्सा है जो अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा को सुनिश्चित करती है, जबकि वह किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष में सीधे पक्ष लेने से बचता है।

प्रभाव और महत्व

ईरान से भारतीय नागरिकों की सफल निकासी भारत की विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह भारत की राजनयिक दक्षता और संकट प्रबंधन क्षमताओं को उजागर करता है। ऐसे जटिल भू-राजनीतिक माहौल में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकालना एक बड़ी उपलब्धि है, जिसके लिए विभिन्न देशों के साथ समन्वय और तत्काल योजना की आवश्यकता होती है। दूसरे, यह भारतीय नागरिकों के बीच सरकार में विश्वास पैदा करता है कि उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा, चाहे वे दुनिया के किसी भी हिस्से में हों, जिससे प्रवासी भारतीयों के मन में सुरक्षा की भावना मजबूत होती है। तीसरे, यह घटना वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती मानवीय भूमिका और एक जिम्मेदार हितधारक के रूप में उसकी स्थिति को मजबूत करती है, जो केवल अपने नागरिकों की ही नहीं बल्कि कभी-कभी अन्य देशों के नागरिकों की भी सहायता करता है। यह पश्चिम एशिया में भारत के रणनीतिक हितों पर भी प्रकाश डालता है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार मार्गों के लिए महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक अस्थिरता के बावजूद अपने हितों की रक्षा और अपने नागरिकों की सहायता करने के लिए सक्रिय कदम उठा सकता है, जबकि वह किसी भी देश के साथ सीधे टकराव से बचते हुए एक स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखता है।

परीक्षा के लिए महत्व

  • UPSC: Prelims में अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत की विदेश नीति, भू-राजनीति (पश्चिम एशिया), मानवीय मिशनों और भारत की राजनयिक क्षमताओं से संबंधित प्रश्न आ सकते हैं। Mains में, यह भारत की विदेश नीति, भू-रणनीति और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर निबंधों और सामान्य अध्ययन के प्रश्नों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है।

  • SSC: General Awareness खंड में वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं, विदेश मंत्रालय के कार्यों, और भारत के विभिन्न निकासी अभियानों के बारे में प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यह करंट अफेयर्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • Banking: IBPS PO, SBI PO और अन्य बैंकिंग परीक्षाओं में वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के आर्थिक प्रभावों, जैसे तेल की कीमतों पर प्रभाव, और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर इसके संभावित प्रभावों से संबंधित सामान्य जागरूकता प्रश्न आ सकते हैं।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  • प्रश्न 1: भारत ने 17 मार्च 2026 को किस देश से अपने 600 से अधिक नागरिकों को निकाला?
    उत्तर: ईरान से।

  • प्रश्न 2: इस निकासी मिशन में नागरिकों को किन दो पड़ोसी देशों के रास्ते निकाला गया?
    उत्तर: आर्मेनिया और अज़रबैजान।

  • प्रश्न 3: यह निकासी किस क्षेत्रीय संघर्ष के बीच हुई?
    उत्तर: US-इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण उत्पन्न तनाव के बीच।

याद रखने योग्य तथ्य

  • भारत ने 17 मार्च 2026 को ईरान से 600 से अधिक नागरिकों को निकाला।

  • यह निकासी US-इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच हुई।

  • मिशन में आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते का उपयोग किया गया।

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करंट अफेयर्स
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