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भारत का राजकोषीय घाटा FY26: फरवरी 2026 तक 80.4%

30 मार्च 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, FY26 में भारत का राजकोषीय घाटा फरवरी 2026 तक 12.53 लाख करोड़ रुपये रहा, जो संशोधित अनुमान का 80.4% है। जानें यह सरकारी नौकरी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।

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भारत का राजकोषीय घाटा FY26: फरवरी 2026 तक 80.4%

परिचय

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट में, 30 मार्च 2026 को जारी आंकड़ों से पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में भारत का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 की अवधि के लिए 12.53 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह आंकड़ा पूरे वित्तीय वर्ष FY26 के लिए सरकार के संशोधित अनुमान का 80.4% दर्शाता है, जो घाटे में कमी का एक सकारात्मक संकेत है। यह खबर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्त से संबंधित करंट अफेयर्स का एक प्रमुख पहलू है। राजकोषीय घाटे का संकुचित होना सरकार के वित्तीय प्रबंधन और आर्थिक स्थिरता के प्रयासों को दर्शाता है, जो सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों के लिए समझने योग्य एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक है। यह दर्शाता है कि सरकार अपने राजकोषीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सही राह पर है।

मुख्य विवरण

भारत का राजकोषीय घाटा, जो कि सरकार के कुल राजस्व और कुल व्यय के बीच का अंतर होता है, जब व्यय राजस्व से अधिक होता है, वह फरवरी 2026 तक 12.53 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा सरकार द्वारा FY26 के लिए अनुमानित संशोधित राजकोषीय घाटे के 80.4% तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्तीय वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को इंगित करता है। उदाहरण के लिए, पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में यह 90% से अधिक रहा था, जबकि इस वर्ष इसमें उल्लेखनीय कमी आई है। इस कमी के मुख्य कारणों में राजस्व संग्रह में वृद्धि और सरकारी खर्चों का प्रभावी प्रबंधन शामिल है। अप्रत्यक्ष करों, विशेष रूप से GST (Goods and Services Tax) संग्रह में मजबूत वृद्धि और प्रत्यक्ष करों में सुधार, जैसे कि व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट कर, ने सरकार के खजाने को मजबूत किया है। इसके साथ ही, पूंजीगत व्यय पर ध्यान केंद्रित करते हुए विवेकपूर्ण तरीके से खर्च करने की नीति ने भी घाटे को नियंत्रित करने में मदद की है। सरकार ने FY26 के लिए राजकोषीय घाटे को GDP के 5.1% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है, और यह प्रारंभिक आंकड़े उस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत देते हैं। ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन और सरकार की वित्तीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भारत में राजकोषीय घाटा एक लंबे समय से आर्थिक नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय रहा है। उच्च राजकोषीय घाटा अक्सर मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में वृद्धि और सरकारी ऋण में वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद से, भारत ने राजकोषीय समेकन (fiscal consolidation) की दिशा में कई प्रयास किए हैं, जिसका उद्देश्य सरकारी वित्त को स्थायी बनाना है। Fiscal Responsibility and Budget Management (FRBM) Act, 2003, जैसे कानूनों का उद्देश्य राजकोषीय घाटे को एक प्रबंधनीय स्तर पर लाना और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना था। COVID-19 महामारी के दौरान, अर्थव्यवस्था को सहारा देने और नागरिकों को राहत प्रदान करने के लिए सरकार को अपने खर्चों में भारी वृद्धि करनी पड़ी थी, जिसके परिणामस्वरूप राजकोषीय घाटा काफी बढ़ गया था। हालांकि, महामारी के बाद, सरकार ने धीरे-धीरे राजकोषीय घाटे को कम करने और इसे पूर्व-महामारी के स्तर पर वापस लाने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। FY26 के लिए 5.1% का लक्ष्य इसी दिशा में एक कदम है, जो राजकोषीय विवेक के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वर्तमान में सामने आए आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार अपने राजकोषीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के सही राह पर है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सकेगी और भविष्य में अधिक टिकाऊ विकास संभव होगा।

प्रभाव और महत्व

राजकोषीय घाटे में कमी के कई महत्वपूर्ण आर्थिक निहितार्थ हैं। सबसे पहले, यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था में विश्वास बढ़ाता है। एक नियंत्रित घाटा देश की ऋण रेटिंग में सुधार कर सकता है, जिससे भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से कम दरों पर धन उधार लेना आसान हो जाता है, जिससे देश की उधार लेने की लागत कम होती है। दूसरे, यह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करता है। जब सरकार कम उधार लेती है, तो बाजार में तरलता (liquidity) का दबाव कम होता है, जिससे कीमतों में स्थिरता आती है और आम आदमी को राहत मिलती है। तीसरे, कम घाटा सरकार को विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक उत्पादक तरीके से खर्च करने के लिए अधिक वित्तीय गुंजाइश प्रदान करता है, जिससे बुनियादी ढांचे और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ सकता है। यह निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करता है, क्योंकि सरकार द्वारा कम उधार लेने से निजी क्षेत्र के लिए उधार लेने के अवसर बढ़ते हैं और ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। कुल मिलाकर, यह वित्तीय स्थिरता के एक मजबूत संकेत के रूप में कार्य करता है, जो सतत आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए, राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना आर्थिक संप्रभुता (economic sovereignty) और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे देश एक मजबूत आर्थिक स्थिति प्राप्त कर सके।

परीक्षा के लिए महत्व

  • UPSC: Prelims में राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा, प्राथमिक घाटा जैसी अवधारणाओं और FY26 के लिए लक्ष्यों पर प्रश्न आ सकते हैं। Mains (GS-III: भारतीय अर्थव्यवस्था) में राजकोषीय नीति, FRBM Act, सरकारी ऋण और उनके आर्थिक प्रभावों पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं, साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति पर भी प्रश्न आ सकते हैं।

  • SSC: General Awareness सेक्शन में राजकोषीय घाटे का अर्थ, वर्तमान FY26 के आंकड़े और GDP के प्रतिशत के रूप में लक्ष्य पर सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। सरकारी बजट से संबंधित सामान्य शब्दावली भी महत्वपूर्ण है।

  • Banking: IBPS PO, SBI PO और अन्य बैंकिंग परीक्षाओं में राजकोषीय घाटे का मुद्रास्फीति, ब्याज दरों और बैंकों के NPA पर प्रभाव से संबंधित प्रश्न आ सकते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के मूलभूत सिद्धांतों और मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतकों को समझना आवश्यक है।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  • प्रश्न 1: फरवरी 2026 तक भारत का राजकोषीय घाटा FY26 के संशोधित अनुमान का कितना प्रतिशत रहा?
    उत्तर: 80.4%।

  • प्रश्न 2: FY26 के लिए भारत सरकार का राजकोषीय घाटे को GDP के कितने प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य है?
    उत्तर: 5.1%।

  • प्रश्न 3: राजकोषीय घाटा क्या है?
    उत्तर: सरकार के कुल राजस्व और कुल व्यय के बीच का अंतर, जब व्यय राजस्व से अधिक होता है।

याद रखने योग्य तथ्य

  • फरवरी 2026 तक राजकोषीय घाटा 12.53 लाख करोड़ रुपये रहा।

  • यह FY26 के संशोधित अनुमान का 80.4% है।

  • सरकार का FY26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP का 5.1% है।

  • यह आंकड़ा 30 मार्च 2026 को जारी किया गया।

  • राजस्व संग्रह में वृद्धि और प्रभावी व्यय प्रबंधन प्रमुख कारण हैं।

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